नीट (NEET) यूजी 2026 परीक्षा को लेकर मचे बवाल के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सीबीआई (CBI) ने पेपर लीक मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे घोटाले के तार राजस्थान के सीकर कोचिंग हब से जुड़े हुए हैं, जहाँ परीक्षा से पहले ही पेपर का सौदा किया गया था।
सीकर में 10-10 लाख रुपये में बिका पेपर
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सीकर कोचिंग हब में परीक्षा से पहले ही छात्रों के साथ प्रश्नपत्र का सौदा शुरू हो गया था। आरोपियों ने पेपर लीक करने के बदले छात्रों से 10-10 लाख रुपये तक की मांग की थी। इस गिरोह में कई छात्र और बिचौलिए शामिल थे जो व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर पेपर वायरल कर रहे थे।
CBI की गिरफ्त में 5 मुख्य आरोपी
सीबीआई ने 24 घंटे की सघन पूछताछ के बाद इन मुख्य चेहरों को गिरफ्तार किया है:
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विकास: मुख्य आरोपी विकास ने पिछले साल ही सवाई माधोपुर के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री ली थी।
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मांगीलाल और दिनेश: जयपुर निवासी ये दोनों आरोपी पेपर वितरण नेटवर्क का हिस्सा थे।
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शुभम खैरनार: नासिक से गिरफ्तार इस आरोपी ने पेपर को महाराष्ट्र तक पहुँचाया था।
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मनीषा: पुणे की इस ब्यूटीशियन के 21 खातों में पेपर लीक से जुड़े लगभग 10 लाख रुपये जमा होने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और दोबारा परीक्षा की मांग
पेपर लीक की खबरों के बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में मांग की गई है कि एनटीए (NTA) से छात्रों का भरोसा उठ चुका है, इसलिए पूरी परीक्षा की जांच कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। यह भी दावा किया गया है कि टेलीग्राम पर वायरल हुए गेस पेपर के 100 से अधिक सवाल वास्तविक पेपर से हूबहू मिलते थे।
23 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर
नीट परीक्षा में शामिल हुए करीब 23 लाख अभ्यर्थी इस समय मानसिक तनाव में हैं। छात्रों का सवाल है कि कुछ लोगों की धोखाधड़ी की सजा उन सभी को क्यों दी जा रही है। यदि परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की जाती है, तो इसका सीधा असर छात्रों की काउंसलिंग और पूरे शैक्षणिक सत्र पर पड़ेगा।
भविष्य के लिए नए सुरक्षा मॉडल पर विचार
एनटीए अब इस तरह की धांधली रोकने के लिए कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) और हाइब्रिड मॉडल अपनाने पर विचार कर रहा है। इसमें प्रश्नपत्रों को एन्क्रिप्टेड फॉर्म में डिजिटल लॉकिंग सिस्टम के जरिए सीधे सेंटर पर भेजने की योजना है। इसके अलावा नेशनल एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी कमीशन (NEIC) जैसी स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
